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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

एक दरवाजा रौशनी का

#
वो एक दरवाजा रौशनी का
आज अँधेरे से भर गया
वो एक रास्ता उम्मीद का
दिवार के पार गुजर गया

उम्र से भी लम्बी सड़क
ये इंतजार के किनारे
अब दर ना चौखट यहाँ
सभी कुछ तो उधड़ गया
वो एक रास्ता उम्मीद का
दिवार के पार गुजर गया

#
जब तलक सांस बाकि
गुरजने वाले हैं दिन रात
यादों के लम्पपोश के नीचे
रूह का पिंजर उजड़ गया
वो एक रास्ता उम्मीद का
दिवार के पार गुजर गया

#सारस्वत
27112013 

रविवार, 24 नवंबर 2013

ये ज़मीन वाला ...


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रब देख रहा है सब देख रहा है ,
फिर भी परवाह नहीं करता
ये ज़मीन वाला
उस आसमान वाले से अब डरा नहीं करता
जैसे शाजिश की मिटटी  में ,
बोया गया उगाया गया बीज
बड़ा पेड़ बन कर भी ,
अमर्त के फल कभी दिया नहीं करता   
वैसे ही अईय्यासी की ,
नीव पर खड़ी हुई इमारत बुलंद में
प्रतिध्वनी देता ,
मन्दिर का घंटा कभी भी बजा नहीं करता
साफगोई की दस्तकारी में ,
माहिर लोग मिलेंगे चारों तरफ
देखो तो सही ,
बंद आंखे खोलकर 'क्या कहा ?? जी नहीं करता
नक़ाब लगे चेहरे के पीछे भी ,
 होता है एक चेहरा यक़ीनन
'जो,सच कहता है
इतनी चालाकी से , कोई यकीं नहीं करता
#सारस्वत
24112013

शनिवार, 16 नवंबर 2013

भारत रत्न सचिन












#
जुनूं
क्रिकेट धरातल पर
धुर्व तारे सा अडिग
रोशन जहाँ आदित्य
सुर्य कमल सा चिन्ह
जादू कड़ी मेहनत
पक्का इरादा अनुशासन
'भारत रत्न '
सचिन
#सारस्वत
16112013

#
सुनते आये थे हम क्रिकेट का भगवान है तू
सचिन रमेश तेंदुलकर सचमुच महान है तू

दुनिया जीत ली विकटो के बीच में दौड़ कर
दिल जीता खड़े हो अनुशासन के छोर पर
मेहनत ईमानदारी का साक्षात प्रमाण है तू

आँसु तेरी भी आँख में आते हैं मेरी तरहा
अपने तुझे भी याद आते हैं सब कि तरहा
आज मालुम हुआ मेरी तरहा इंसान है तू

भारत रत्न
सचिन
#सारस्वत
16112013


शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

मै और तू

मै और तू 

#
मै
आज भी अधूरा
आज भी अकेला
आज भी व्यवधान
तू
तू भी अधूरा
खुद में लिपटा सा
घमंड का प्रतिमान
मै और तू मिल जाये तो
धरा को आकाश मिल जायेगा
अधूरेपन को आयाम मिल जायेगा
घमंड
अपनेपन के आगे झुक जायेगा
अहम
खुदबखुद पराजित हो जायेगा
मैं और तू
अधूरे शब्द
बस
सवम के लिए कटिबद्ध
याद कोई सपना नही होती
सच्चाई पागलपन में नही रोती
मन का अकेलापन कचोटता है
भीड़ के शोर से दूर भागता है
क्योंकि
मै और तू में बनती नही है
हम कि अभिलाषा का दीपक
सूनेपन के अंधेरों में भी
अकांक्षा कि रौशनी देता है
मैं हाथ बढ़ा रहा हूँ
तू भी साथ दे मेरा

आज से
हम बन जाये
हम दोनों
#सारस्वत
08112013

दिल के हिस्से में


दिल के हिस्से में 


#
दिल के हर एक हिस्से में अलग तस्वीर रखते हैं
लोग आशिकी भी करते हैं वक्त गुजारने के लिए
किस आंसु पे यकीन करूं मेरे लिए रोया होगा
लोग बहाने ढूंढ लेते हैं यहाँ वक्त गुजारने के लिए
#सारस्वत
08112013

मंगलवार, 5 नवंबर 2013

इज्जत


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मैंने इज्जत से लपेट रक्खा है बदन को 

इसको भी उतारूंगा तो नंगा हो जाउगा 

#सारस्वत 05112013

भईयादूज

#
कजरी कि अधमुंदी आँखे
आहट के एहसास से चहक उठी
आ गए तुम !
कैसे ना आता दीदी !!
त्रिवेणी कि आवाज कानो में रस घोल गई
मुस्कुरा कर कजरी ने आँखे खोली
कमरे में गुप्प सन्नाटे के आलावा कोई नही था
मन के आंगन में घबराहट आने लगी
माथे पर पसीने कि बूंदे उभर आई
कजरी उठने लगी तो उसका हाथ
बराबर में रक्खी थाली से टकराया
कजरी ने थाली कि तरफ देखा
रोली मोली चावल की थाली को भी
त्रिवेणी का इन्तजार अभी भी बाकी था
एक बार फिर से कजरी ने अखबार उठा लिया
पता नही कितनी बार पढ़ चुकी थी
इस बार फिर से हैडलाइन पर ही निगाहें अटकी थी
बीते दिनों में यहाँ बलवा हुआ था
हिंसा कि आग में बहुत कुछ भस्म हो गया
शहर और गॉव में अभी भी दहशत का माहोल है
दंगो के बाद जिले में वारदातो का दौर जारी है
ऐसा पहले कभी नही हुआ
हमेशा ही
भईयादूज पर त्रिवेणी
सुबहा ही आ जाता था
वो तो अब भी आने को तैयार था
लेकिन मैंने ही मना किया था इसबार
भाई
भईयादूज तो अगले साल भी आएगी
त्रिवेणी तेरे साथ कुछ हादसा हो जाये
तो किसको मुँह दिखाउंगी
मेरा भाई मेरी खुशियों में साथ रहे
यही कामना है मेरी
मैं तेरी लम्बी उम्र कि रोज़ दुआ मांगती हूँ
भाई मैं तेरी जिंदगी को खतरे में नही डालूंगी
इस बार मैं भईयादूज पर तुझको नही बुलाऊंगी
कजरी नल के पास गई और
चेहरे को धोने लगी
अब तक सुकून की हवा पानी में घुल चुकी थी
कजरी भी सम्भल चुकी थी
सधे हुये कदमों के साथ चल कर
कमरे में पहुच कजरी ने
सजी हुई थाली को उठाया और पलंग पर आकर बैठ गई
फिर मुस्कुराते हुए थाली में रक्खे
नारियल को उसने तिलक किया चावल भी लगाया
और खुद ही बुदबुदाने लगी
भाई तू सुरक्षित रहना चाहिए
भईयादूज तो हर साल आएगी
#सारस्वत
05112013

सोमवार, 4 नवंबर 2013

हाथ की लकीरों की जानिब

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देख हाथ की लकीरों की जानिब 
नजूमी ने कोई नई बात नही बताई 

वही अपनों की साजिशों की बातें 
जो सब मैं पैहले से ही जानता हूँ 
मेरी बर्बादी की ख्वाइश रखने वाले 
तुझे तो मैं शक्ल से भी पह्चानता हूँ 
#सारस्वत

05112013

मै हूँ आम आदमी

मै हूँ आम आदमी 

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मै हूँ आम आदमी
जो अमरुद कभी बन ना सका
टपका किस्मत पे लगा फटका
और दसहरी भी लंगड़ा हुआ 
मुझ में और आम तुझ में
कोई ज्यादा फर्क नही है
शक्ल अक्ल रंग ढंग जुदा तो हैं
पर इतनी भी अलग नही है
आम गर तू फलों का रजा है तो
आम आदमी भी बादशाहा से कम नही
तुझ में है स्वाद सेहत का राज
मुझ में भी गरत कुछ कम नही है
तुझ को खाया जब भी जिसने भी
तेरी तारीफ में उसने कसीदे पढ़े है
मुझको खा चबा गये वो चंद लोग
जो नेता की नस्ल में पैदा हुए है
पर आज अपना दर्द कहु तो किस से
इज्जत की तार तार , पगड़ी के किये हिस्से
जेब कतर ली मेरी कमर तोड़ दी
मरजानी मंहगाई ने , रह गया पिस के
नाम तक मेरा चुरा लिया आज चोरों ने
आम आदमी रख लिया नाम नेता खोरो ने
अब मुझे यंहा कोई पहचानता नही है
आम आदमी भी आम आदमी को जनता नही है
लेकिन मैं खुश हूँ फिर भी
गिरगिट का रंग मुझ पे चढ़ न सका
मैं हूँ वो आम आदमी
जो अमरुद कभी बन ना सका
#सारस्वत
04112013

रविवार, 3 नवंबर 2013

पटाके छोड़ना

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पटाके छोड़ना कोई आसान काम नही है 
दिल मज़बूत होना जरूरी है मुश्किलों में 
जमाना गुजर जाता है किसी को पटाने में
पत्थर का दिल करना पड़ता है छोड़ने में 
#
सारस्वत
04112013

शनिवार, 2 नवंबर 2013

आओ सब मिल कर दीप जलाये

आओ सब मिल कर दीप जलाये 









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आओ सब मिल कर दीप जलाये
मन से अंधियारों को दूर भगाये
ह्रदय आनंदित दीपावली मनाये
आओ सब मिल कर ..
हवाओं से कह दो होसले से आये
खुश्बू फ़िज़ा की प्यार बन के जाये
आओ मोहब्बत का दीप जलाये
आओ सब मिल कर ..
पलकों से कह दो वो मुस्कुराये
अधरों से कह दो वो गुनगुनायें
आओ अपनेपन का दीप जलाये
आओ सब मिल कर ..
बुझती उमंगे फिर से जगमगाये
मन के आँगन उजालों से नहाये
आओ अंतर्मन का दीप जलाये
आओ सब मिल कर ..
#सारस्वत
02112013