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शनिवार, 27 दिसंबर 2014

मन में
















#
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में
सवाल ही सवाल हैं , व्याकुल मन में

कुछ सुलझी अनसुलझी सी यादें हैं
कुछ अटकी सटकी सी बातें हैं
कुछ स्मृतियाँ हैं प्रतिमाओं की
कुछ जीवित शंकाएं हैं सागर मन में
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में

कभी शब्दों को शब्द नहीं मिलते हैं
कभी खुद में उबलने सुलगने लगते हैं
कभी अखरने लगते हैं शब्दकोश 'तो,
कभी चुप्पी साध लेते हैं मंथन में
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में

कहीं बर्फीली चादर को ओढ़े रिश्ते हैं
कहीं पतझड़ से बिखरे छितरे पत्ते  हैं
कहीं फैला घनीभूत कुंठाओं का कोहरा
कहीं भ्रम के बादल हैं मन उपवन में
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में
#सारस्वत
27122014 

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

रामा दुहाई [एल्बम गीत ]

#
नींद नहीं आई
यही है सच्चाई
नींद नहीं आई , यही है सच्चाई
रामा दुहाई  …
रामा दुहाई  … …
#
गलत सही का कुछ भी मुझको , पता नहीं था
दोस्तों ने पकड़ के मुझको , बिठा लिया था
आज ख़ुशी का दिन बता के , चढ़ा दिया था
एक पैग वहीं पे मैंने , लगा लिया था
पर साथ में तेरे  …
ये क्यूँ आई  … …
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#
मैं तो तुझको चिड़ा रहा था , जान ओ मेरी
अरे' कोल्डड्रिंक है  जान ले तू भी जान ओ मेरी
गलती करके बोल रहे हो , मान लो मेरी
तोड़ दो बोतल 'मेरे दिलबर' जान ओ मेरी
माफ़ी तो मैने  …
मांग ली माई  … …
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#
तुम बिस्तर पर करवट काहे बदल रहे हो
मेरी तरहा से तुम भी शायद मचल रही हो
सारी सारी रात जगाया 'अब, रहने भी दो
अपनी बाँहों में मुझको 'तुम, सोने भी दो
तेरी मेरी साँसें  …
पास जो आई  … …
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#
नींद नहीं आई
यही है सच्चाई
नींद नहीं आई , यही है सच्चाई
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#सारस्वत
02042005 

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

आईने के सामने

#
अपने आप से मिलता नहीं हूँ , मैं आईने के भी सामने
पता नहीं कब किस बात पर , शर्मिंदा कर दे ये मुझे

बातें होती नहीं मेरी खुद से , अब अपने आप से कभी
मशवरे फ़ालतू के आज कल , अच्छे नहीं लगते मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....

किसकी फ़िक्र करूँ बता , खुद की या तेरी नाराजगी की
तूने ही तो सिखाया था कल , मतलब का मतलब मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....

नई रौशनी लेकर चलता हूँ , अब साया नजर नहीं आता
यही इलाज था इसका  , हर वक़्त टोकता था ये मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....

बेशर्मी का राज क़ायम है , अब सल्तनत ऐ ज़मीर पर
हाँ हाँ ' कर ले मुलाकात ईमान , आकर डरा ले अब मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....
#सारस्वत



रविवार, 7 दिसंबर 2014

सांस उदारी बड़ा भिखारी

#
सांस उदारी बड़ा भिखारी
केसदा करदा तू मान
मिटटी पुतला देश बगांना
कदे तां खुद नू जान
#
अल्लन बल्लेया धूंधूं जल्लेया
धुँयाँ बणी ते राक्ख
जिंदड़ी पाई नॉल गवाई
लब्बेया की कुछ चाक्ख
पांज घरांदा बण प्रोणा
कदें ना सक्केया जान
मिटटी पुतला देश बगांना ...

मेरा तेरा करदे करदे
कीकुछ दस तूं पाया
धनं दोल्लात बेट्टा बेट्टी
साब कुछ तां गवाया
झुट्टे सारे रिस्ते नात्ते
रब्ब तों तूं अन्जान
मिटटी पुतला देश बगांना ...
#सारस्वत
07122014

बुधवार, 3 दिसंबर 2014

वो भोपाल गैस त्रासदी की रात

#
वो दो और तीन दिसंबर की रात 
वो भोपाल गैस त्रासदी की रात 
#
वो मौत के ताण्डव की रात 
वो यूनियन कार्बाइड की रात 
कितनी भयानक 
कितनी दर्दनाक 
वो हैवान के अट्टाहस की रात 
वो शैतान की साज़िश की रात 
जब शमशान हुआ शहर 
उघडा कबिस्तान का क़हर 
वो आधुनिक तरक़्क़ी की रात 
वो औद्योगिक त्रासदी की रात 
जो सोये उस रात 
और सोये रैह गए 
जब मौत आई दबे पांव और 
लील गई जीवन वो काली रात 

#
हे परमपितापरमेश्वर 
तृप्त अतृप्त 
आत्माओं के ईश्वर 
अगर सुन रहा है तू आज कि रात 
उन मासूम आत्माओं को शांति दो 
आज कि रात 
‪#‎सारस्वत‬ 
02122013

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

गुंज उठा फिर मंगल गान















#
श्री राम चन्द्र को देख सिया ने , माँगा गौरी से वरदान
सियावर बने प्राणों से प्यारे , बने रामचन्द्र अभिमान
बने श्री रामचन्द्र अभिमान
बने मेरा रामचन्द्र अभिमान
गौरी ने ली सिया के मन की , मन मुस्काई पिया के मन की
सिया से बोली भाग्य सजेगा , दशरथ नंदन तेरा बनेगा
दशरथ नंदन तेरा बनेगा
दशरथ नंदन तेरा बनेगा
शुभ आशीष दिया माता ने , श्री राम बनें सिया सम्मान
जनकसुता जान जानकी , राम ही होंगें जानकी प्राण
राम ही होंगें जानकी प्राण
राम ही होंगें जानकी प्राण
फिर हुई तैयारी धनुष यज्ञ की , और राम बने सिया अभिमान
सियाराम हुऐ एकोतनमन प्राण , सियावर राम बने सिया के मान
गुंज उठा फिर मंगल गान
गुंज उठा फिर मंगल गान
एकसूत्र हुऐ सिया और राम,  बीजमंत्र हुआ सियाराम का नाम
सियाराम नाम करे जगत गुणगान , श्री राम बने सिया सम्मान
गुंज उठा फिर मंगल गान
गुंज उठा फिर मंगल गान
गुंज उठा फिर
मंगल गान
#सारस्वत
14041994 

शनिवार, 8 नवंबर 2014

आशिको की बस्ती












#
ये इश्क की गलियां हैं , आशिको की बस्ती है 
वक्त भी ठहर जाता है , यहाँ की रोंनके देख कर 

दिल धडकता है यहाँ , ख्वाईशें जवान होती है 
इबारते लिखी जाती है , मोहब्बत को देख कर 
ये इश्क की गलियां हैं ...
जिन्दगी की चाह में , यहाँ बर्बाद हुए कई लोग
लुट गई रियासते कई , यहां दिल की मुंडेर पर 

ये इश्क की गलियां हैं ...
झील सी आँखों से यहाँ , बचा कोई नही कभी
डूब के जाना कोई , अश्के समन्दर को देख कर 

ये इश्क की गलियां हैं ...
ये इश्क का मोहल्ला है , दीवानों की बस्ती है
जरा होश में आना यहाँ , दिल देख भाल कर 

ये इश्क की गलियां हैं ...
#सारस्वत

14072013

शनिवार, 1 नवंबर 2014

जल्दी के साथ में
















#
वक्त के लिये आज
मेरे पास वक्त नहीं है 'के,
बैठूं दो घडी वक्त के पास में
कल वक्त के पास में
मेरे लिए वक्त नहीं होगा
फूँक देगा जब मुझे
वक्त का गुलाम जल्दी के साथ में
खुद को पता नहीं
कितना चल पाऊँगा कदमों के साथ में
मालूम नहीं मुझे
कहाँ तक जाउँगा वक्त के साथ में
बस दौड़ा जा रहा हूँ
बेमकसद सा मकसद की तलाश में
भाग रहा हूँ मतलब सा
इतिहास लिखने की चाह के साथ में
ख्वाइशों की
पोटली बांध रक्खी है पास में
पल भर का पता नहीं
और सोचता हूँ वक्त गुलाम है मेरा
जबकि जनता हूँ
फूँक देगा मुझे
वक्त का गुलाम जल्दी के साथ में
#सारस्वत
14102014

मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

जिंदगी … चार दिन की



#
जिंदगी  …
चार दिन की ,
कितनी दूर जानी थी
खर्च  …
हो जानी थी ,
खर्च हो गई एक दिन
#
बाकी  …
अब बस यादें हैं हवा में
और  …
बातें हैं यादों में बाकी
जो  …
हवा थी , जिस्म में दौड़ती
कैद से …
हवा हो जानी थी एक दिन
वो  …
हवा , हवा हो गई एक दिन
जिंदगी  …
चार दिन की   …
#
प्राणी  …
मिटटी का दुनियाँ पीर पराई
बंधन  …
रिश्ते नाते सुख दुःख राम दुहाई
मिटटी को  …
खाक हो जाना था किसी दिन
मिटटी  …
जा मिली आखिर मिटटी से
और  …
राख हो गई एक दिन
जिंदगी  …
चार दिन की   …

#सारस्वत
28102014 

रविवार, 19 अक्तूबर 2014

रुक जा साँस जरा लेलूं

#
रुक जा साँस जरा लेलूं तो
हाल नजर का बतलाऊंगा
दम भर दूँ सूखे पत्तों में
फिर सबरंग भी पढ़वाऊंगा
*
उसकी आँखे मद के प्याले
मधुशाला तक ले जाऊंगा
उसकी पलकों से जो छलके
वो मोती भी दिखलाऊंगा
रुक जा साँस जरा लेलूं तो
हाल नजर का बतलाऊंगा
*
ओठों पर था इत्र इश्क का
अभी खुशबु वो सुंघवाउंगा
लब तर थे वादे वफ़ा से
सभी वादे भी वो सुनवाऊंगा
रुक जा साँस जरा लेलूं तो
हाल नजर का बतलाऊंगा
#
रंज ना करना सुनकर तुम
अभी खंजर भी दिखलाऊँगा
दिल में उसके राज़ दबा था
सब राज़ पाश कर जाऊंगा
रुक जा साँस जरा लेलूं तो
हाल नजर का बतलाऊंगा
*
उसकी बस्ती की बंद गलियाँ
सभी तुमको समझाऊंगा
आशिक़ का क्या हाल बुरा था
उस दीवाने सी भी मिलवाऊंगा
रुक जा साँस जरा लेलूं तो
हाल नजर का बतलाऊंगा
#सारस्वत
19102014 

शनिवार, 18 अक्तूबर 2014

किस तरहा से समझाऊं


#

किस तरहा से समझाऊं मैं तुझ को
तू समझता नहीं जान निकल जाती है
*
तू ना आयें तो पथरा जाती हैं आँखे
आ जायें तो धड़कन रुक रुक जाती है
*
ख्याल बादशाही और ये दिल दीवाना  
एतबार की राहें वफ़ा पर ठहर जाती हैं
*
रोज बहाने बनाते क्या तू थकता नहीं
तेरे बहानों से तो रात भी थक जाती है
*
वादो पे जी रहे हम ये भी ख्याल रखना
इन्जार करते करते उम्र बीत जाती है

#सारस्वत
25092014 

बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

इतिहास में समय की खोज करना

#
इतिहास में समय की खोज करना ऐसे है
जैसे तथ्यों में सत्य की खोजबीन करना
खंडहर में दफन ध्वंसावशेषों को ढूंढ़ना
जैसे जीवाश्म में जीवन की खोज करना
इतिहास में ...
इतिहास शीर्ष मुकुट का लिखा जाता है
हार नहीं जीत का कसीदा पढ़ा जाता है
तबाही की गवाही संकेतों में मिलती है
कोई नहीं चाहता सत्य को दर्ज करना
इतिहास में ...
दमन का चाबुक जिंदगी जीने नहीं देता
सोचने समझने का कोई मौका नहीं देता
स्मृतियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी धूमिल होती है
मुश्किल होता है सच को एकत्रित करना
इतिहास में ...
कुछ टुकड़े उपलब्ध होते हैं कुछ लापता
कुछ में जुड़ा कुछ कुछ खोये अपना पता
शौर्य गाथा में ढूंढ़ना मुश्किल होता है खता
टुकड़े टुकड़े बीन कर सच को तलाश करना
इतिहास में ...
#सारस्वत
08102014













हम जिनसे मोहब्बत की बात करते हैं

 #

हम जिनसे मोहब्बत की बात करते हैं
वो हम से दुश्मनी की बात करते हैं

थम लेते हैं शरीक ऐ मेहफिल में हाथ
अकेले में कत्ल करने की बात करते हैं

जब भी कहता हूँ चलो दिल की बतियाएंगे
वो बोलते हैं चलो मुददों की बात करते हैं

कब तलक चलेगा ऐसे पीर ऐ इश्क बता
दरो दिवार भी अब तो सवाल करते हैं

#सारस्वत
23122013

शनिवार, 4 अक्तूबर 2014

अजय भाई जी एवं भाभी जी की 22वी शादी की वर्षगाठं पर


#
कुछ इस तरहा से पार किये , जिंदगी के  ... 22 साल  एक साथ 
हरकदम साथ मिला साथी का , रहे हर हाल में  ... एक साथ 


सपनों से समझदारी का सफर 
योवन से जिम्मेदारी का सफर 
कदम से कदम मिला के साथ 
कुछ इस तरहा से पार किये  ... जिंदगी के  ...22 साल  ... एक साथ 

2 शरीर एक आत्मा 
दोनों दिलों में एक धड़कन
सुख में दुःख में एक साथ 
कुछ इस तरहा से पार किये  ... जिंदगी के  ...22 साल  ... एक साथ 

आदर्श के बिम्ब प्रतिबिम्ब बने 
अजेय दाम्पत्य जीवन बने 
आपसी समझबुझ के साथ
कुछ इस तरहा से पार किये  ... जिंदगी के  ...22 साल  ... एक साथ 
शुभकामनाओं के साथ 
हार्दिक बधाई 
#सारस्वत 
04102014

सोमवार, 29 सितंबर 2014

आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद
















#
सुनो सुनो
सुनो सुनो जरूरी ऐलान
ध्यान लगाना खोल कर कान
फिर मत कहना समझदारो
लूट ले गया कोई ज्ञान
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद

यहाँ हसी उड़ा रहे हिन्दू  … …हिन्दू की
मजाक बना रहे चन्दू-नन्दू  .. हिन्दू की
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद

रोज चुटकुले नये बनाते , हस कर फिर सबको हैं सुनाते
देवी देवताओं के उपर हिन्दू , उलटे सीधे किस्से बनाते
टैग करने वाले भी हिन्दू है ,
शेयर करने वाले भी हिन्दू
संस्कारों का दावेदार 'यहाँ , धज्जी उड़ा रहा हिंदुत्व की
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद

हिन्दू को फुर्सत नहीं जरा भी , अच्छा बुरा समझने की
ये समझदार बड़ा हो गया , कमियाँ ढूंढे अब अपनों की
हिन्दू गंगा गौ गायत्री को भुला ,
बीमारी लगी सैकुलर का झूला झुला
सनातन धर्मी कब्र खोद रहे , झण्डे-बरदार हिन्दू की
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद
आनंद ही आन्नद है , आनंद ही आन्नद
#सारस्वत
29092014


शनिवार, 20 सितंबर 2014

जीवन रक्षक जीवनदाता












#
बून्द बून्द पानी की
बून्द बून्द लहू का
जीवन रक्षक जीवनदाता
भाग्य का भाग्य विधाता
#
काम किसी के आवो
प्यासे को पानी पिलावो
बून्द बून्द गागर को भरदे
पानी ना व्यर्थ गवावो
बून्द बून्द पानी की
बून्द बून्द लहू का
जीवन रक्षक जीवनदाता
भाग्य का भाग्य विधाता
#
खून की कीमत जानो
जान की जान बचावो
बून्द बून्द का दान करो
तो महादानी कहलावो
बून्द बून्द पानी की
बून्द बून्द लहू का
जीवन रक्षक जीवनदाता
भाग्य का भाग्य विधाता
#सारस्वत
20092014


रविवार, 14 सितंबर 2014

हिंदी की प्रगति में










#
मातृभाषा के तिलक से 'हिंदी, मात्र भाषा हो गई
निज भाषा उन्नति अहै के ,शब्द सार्थक हो गऐ
#
आकांक्षा अभिलाषा का , इच्छा दान कर दिया
ज्ञान के समर्थक विदूषक , मूड धन्य हो गऐ
निज भाषा उन्नति अहै के  ...
#
लालच लिप्सा से सरल ,आसान भूमि से ज़मीन
अर्थ के सब अर्थ बदले , वित्त समर्थक हो गये
निज भाषा उन्नति अहै के  ...
#
हिंदी की प्रगति में , चन्द्र सुर्य भी चाँद सुरज हुऐ
अग्नि आग - रात्रि रात ,लब्ज़ शब्द सार्थक हो गऐ
निज भाषा उन्नति अहै के  ...
#
भाषाई विवाद में सिकुड़ी हिंदी सिमट के रह गई
प्रगति की राह के राही , घटक परिवर्तक हो गऐ
निज भाषा उन्नति अहै के  ...
#
पंजाब सिंधु गुजरात मराठा द्रविड़ उत्क्ल बंग
हिंदी विरोधी भाषा-भाषी , क्षेत्रप मस्तक हो गए
निज भाषा उन्नति अहै के  ...
#सारस्वत
14092014 

गुरुवार, 11 सितंबर 2014

आओ दिलों के बीच से दीवारें गिरायेंगे

#
आओ दिलों के बीच से दीवारें गिरायेंगे
आओ आज फांसलों के फैंसले मिटायेंगे
#
मुस्कुराकर मुस्कराहट का स्वागत करो
मुरझाये हुए रिश्ते फिरसे तर हो जायेंगे
आओ दिलों के बीच से  ...
मरते हुए रिश्तों के लिए कभी रो कर देखो
घायल हुए रिश्तों के भी जख्म भर जायेंगे
आओ दिलों के बीच से  ...
मुश्किलों का डट कर मुकाबला किया करो
बिगड़े हुए हालात हौसलों से सुधर जायेंगे
आओ दिलों के बीच से  ...
गफलती से कैहदो दूर होजाओ नजरों से
खुशियों के भाग खुद बखुद जाग जायेंगे
आओ दिलों के बीच से  ...
मायूसियों से हमारा तुम्हारा क्या वास्ता
लगाकर गले ख्वाईश को सबको जगायेंगे
आओ दिलों के बीच से  ...
#सारस्वत
11092014

रविवार, 31 अगस्त 2014

बेटी दिवस पर लोरी

#
उउउऊंऊंऊंऊंऊंऊं ……  उउउऊंऊंऊंऊंऊंऊं ……
उउउऊंऊंऊंऊंऊंऊं ……  उउउऊंऊंऊंऊंऊंऊं ……

दिन जदों जावे रात्ती आवे
सो जा सो जा बिटिया रानी
सो जा  … सो जा  …  तू भी सो जा  …
सो जा  … सो जा  …  बिटिया राणी
लोरी सुनाने आई निंदिया राणी
#
चंदा बी आया  … आया …
तारे बी आये  … आये  …
चंदा बी आया  … तारे बी आये  …
सारे ही आये तन्नू , लोरियाँ सुनाने
सो जा  … सो जा  …  कुड़िये सीयाणी
कल नूं कहिये  … नई कहाणी …
लोरी सुनाने आई  … निंदिया राणी

उउउऊंऊंऊंऊंऊंऊं ……  उउउऊंऊंऊंऊंऊंऊं ……  
#सारस्वत
31082014 

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

कौन है आम आदमी











 #
आखिर ये आम आदमी है कौन , कब से सोच रहा हूँ ..
सवाल की मुंडेर पर खड़ा हूँ , यही जवाब खोज रहा हूँ ..

वो जिस ने दंगा नही चाहा कभी , क्या वो है आमआदमी ..
या जो तैयारियाँ कर के बैठा हो यहाँ , बस वो है आमआदमी ..

जो घर में कैद नजरबंद मुजरिम की तरहा , वो है आमआदमी ..
या जो मजहब की आड़ ले कत्ल कर देता है , वो है आमआदमी ..

जो रोज़ी रोटी की जद्दोजेहद में है उलझा , वो है आमआदमी ..
या वो जो नफरत की रोटीयाँ है सेकता , वो है आमआदमी ..

करे जो सियासत द्न्गेफसाद लाश की , नही वो आमआदमी ..
जो इंसानियत में घोलता हो जैहर , नही है वो आमआदमी ..

सिर्फ टोपी पैह्न्ने से नही हो जाता है , कोई भी आमआदमी ..
हिन्दू मुस्लिम के झगडे ना हों जो सोचता है , वही है आमआदमी ..

कोमी फसाद न हो जिसकी हो कोशिशें यहाँ , वही है आमआदमी ..
जो तोड़ सकता हो ये नफरत की दीवारें , बस वही है आमआदमी ..
#सारस्वत
05092013

क्या लिखूं ?















#
पशोपेश में हूँ 
खुद में उलझा हूँ 
क्या लिखूं ?
कुछ भी लिखने से पैहले
ख्याल
अपने शहर की तरफ चला जाता है
क्या से क्या बन गया है
हस्ता खेलता शहर सुलगने लगा है
ये कैसी फिजा बैह रही है
जो नफरतों के बीज बो रही है
ऐसे तो ये कभी
सीधा खड़ा नही हो सकेगा
नफरत की बैसाखी के सहारे
आखिर ये कैसे चल सकेगा
दंगो ने शहर को
व्हीलचेयर पर पंहुचा दिया
हाथ पैर नाक कान आंख मुँह
वाला शहर
मेरी तरहा ही विकलांग हो गया है
मैं तो शरीर से ही विकलांग था
लेकिन मेरा शहर आज
हिन्दू मुस्लिम में बट गया है
मानसिक विकलांग हो गया है
#सारस्वत
10092013

ना जाने किस की बदनजर लग गई मेरे शहर को












#
एहसास अल्फाज सब मोहताज हो गये मजहबों के
ना जाने किस की बदनजर लग गई मेरे शहर को

इस कदर दंगे हुए हैं मेरे शहर में कुछ इन दिनों में
खुले आम लोग कैहने लगे हैं साम्प्रदाई शहर को

झगड़ो से दूर रैहते थे कल सब चैन 'ओ, अमाल से
अब रोज़ ही झुलसाती है आग बवाल की शहर को

कल तलक तो इंसान बसते थे अमन की बस्ती में
हैवानों के हवाले ही कर दिया आज किसने शहर को

हिन्दू मुसलमान के नाम पर बट गये यहाँ मोहल्ले
ये हमने किस के नाम कर दिया अपने ही शहर को
#सारस्वत
04092013

शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

मैं स्म्रति वन में ..



#
मैं स्म्रति वन में ठहर गया 
असुवन काजल पे ठहर गया 
#
खट्टी मिट्ठी यादों की क्यारी
कभी बचपन के गलियारों में
देह उडती पतंग के पँखों पर
मन सप्त रंग सा महक गया
मैं स्म्रति वन में ..
#
कई त्रिष्णा झिलमिल हो उभरी
कहीं वेदना झुरमुट से निकली
झरझर रुनझुन बुँदों की बारिश
पल प्रतिपल अम्बर बहक गया
मैं स्म्रति वन में ..
#
सुर मधुर थाप ह्रदय मन्दिर में
चली चली रे पवन फिर उडी धूल
हुआ शंखनाद चला सम्वाद चक्र
पंखुरी बन उपवन तन चहक गया
.मैं स्म्रति वन में ..
#सारस्वत
27092013





शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

जय हिंद - जय भारत















#
सोचता रहता हूँ अक्सर
खत्म हो जाये अगर
दंगो के जख्मों के निशान
मिट जाएँ फ़ासले
मिट हो जायें ये सब दूरियाँ
#
एक  तरफ से आवाज आये - हर हर महादेव
दूसरी तरफ से जवाब आये - अल्लाह हो अकबर
मुस्कुराकर दोनों गले मिले , रोज़ की तरहा से
हाल पूछा खुशहाली का , आज फिर कल की तरहा से
कुछ देर साथ बैठे , ठण्डी हवा पीपल की छाँव तले
गली कूचे चौबारे साथ में , गलबहियाँ करने लगे
सोचता रहता हूँ अक्सर
खत्म हो जाये अगर
दंगो के जख्मों के निशान
मिट जाएँ फ़ासले
मिट हो जायें ये सब दूरियाँ
#
ना तमंचे से बारूद निकला , ना तलवार घुसी किसी के अंदर
ना दिवार से पत्थर बरसे , ना भगदड़ मची शहर के अंदर
ना किसी ने फतवा जारी किया , ना किसी ने शखनाद किया
ना लाल के खून से लाल हुई धरती , ना नारी को शर्मिंदा किया
ना मजहब ने भौं सिकोड़ी , ना ही धर्म ने की आँखें चौड़ी
मजबूत खड़ी रही , मन्दिर मस्जिद में अमन शांति की जोड़ी
सोचता रहता हूँ अक्सर
खत्म हो जाये अगर
दंगो के जख्मों के निशान
मिट जाएँ फ़ासले
मिट हो जायें ये सब दूरियाँ

जयहिंद
जय भारत
इन्कलाब जिंदाबाद
 वन्देमातरम
#सारस्वत
15121991 

रविवार, 10 अगस्त 2014

#कन्याधन_रक्षाबंधन










#
आने नहीं दिया 

धरा पर 

कभी नेह संचित

गोरैया चिरईया को 

खिलने नहीं दिया

कमल कवंल  


पुष्पित पल्ल्वित 


कन्या को

बिटिया की

गर्भ ग्रह में ही

भ्रूण हत्या 


करने वाले नर पिसाचों

आज  ,


खुश !! तो बहुत होंगे

बधाई देते हुये

कुलदीपक की 


सूनी कलाई को  

#कन्याधन_रक्षाबंधन

#सारस्वत


10082014


गुरुवार, 7 अगस्त 2014

संस्कृत












#
वेद का पहला श्लोक

अग्निम् ईळे पुरोहितं यज्ञस्य देवम्
ऋत्विजम्. होतारं रत्नधातमम्.

संस्कृत
विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद की भाषा है
अतः संस्कृत को विश्व की प्रथम भाषा
मानने से इंकार के लिये
किसी के भी मन में कोई बाकी संशय नहीं रहता है
संस्कृत की
सुस्पष्ट व्याकरण और वर्णमाला की वैज्ञानिकता
स्वम भाषा एवं लिपि के लिए सर्वश्रेष्ठता सिद्ध करती है
संस्कृत
सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्य की धनी है
इस नाते भी संस्कृत की महत्ता निर्विवाद है
संस्कृत
देवभाषा है
शुभदिनसुन्दरहो
#सारस्वत
08082014 

बुधवार, 6 अगस्त 2014

इंतजार शुरू होने वाला है

















#
फिर से ख़त्म न होने वाला
इंतजार शुरू होने वाला है
ख्वाइशों का असर इस बार
मौसम पर नजर आने वाला है
फिर से ख़त्म न होने वाला इंतजार  …

बहुत गुजारी हैं हमने यहाँ
तन्हां अकेली लम्बी रातें
अबके तो कोई वादा भी है
जो साथ में चलने वाला है
फिर से ख़त्म न होने वाला इंतजार  …

पता नहीं जिसको धडकने का
घुम रहा है दिल लिए साथ में
जाने किस पर गिरेगी ये बिजली
जाने किस का कत्ल होने वाला है
फिर से ख़त्म न होने वाला इंतजार  …

फिर लौट आई हैं तमन्नायें भी
काली सर्द रातों के साथ में ही
उम्र की दहलीज है फिर से
खुमारी का दौर आने वाला है
फिर से ख़त्म न होने वाला इंतजार  …

#सारस्वत
13102013

रविवार, 3 अगस्त 2014

साबुत दोस्ती के साथ

#
मानता हूँ के  …
नवाब बन गया है तू ,
लोगो के लिए …
ख़ास बन गया है तू ,
जीने का अंदाज़ …
बन गया है तू ,
सचमुच !!
लाजवाब बन गया है तू  .
पर ,
मेरे लिए तो …
आज भी वही है तू ,
मुझे ,
कोई फर्क नही पड़ता …
अब ,
क्या से क्या बन गया है तू  .
ना !! ना !!
अपना ये रॉब …
कंही और दिखाना …
 और ,
यहाँ ! आना हो तो …
आगे से …
बिना लावालशकर के आना  .
जिन्हें ,
तेरे इस कद से …
कुछ लेना देना हो …
इनको वहां लेकर जाना  .
अरे !!
मुझे तेरी दुआ नहीं …
तू चाहिए …
वही !
यारी  …
जान से प्यारी के साथ
वो भी !!
बिना मिलावट के …
"साबुत दोस्ती के साथ"
#सारस्वत
03082014

गुरुवार, 31 जुलाई 2014

खामोश जी रहा था सफर …














#
खुद चल के रौशनी मेरे , दर तलक आई
खामोश जी रहा था सफर , लो आई रोशनाई
खामोश जी रहा था सफर  …
कुछ बिखरी यादें कुछ , उलटी सीधी बातें
तन्हां लम्बी सी रातें , महफ़िल सजाने आई
खामोश जी रहा था सफर  …
जाले सख्त जॉन दीवारें , टूटे पाये गये बस्ते
दर्द गर्द सर्द हवा , सभी सैरगाह को आई
खामोश जी रहा था सफर  …
लहू चीखा आँसू सूखे , टपका टपका आहें
किश्तों में कत्ल जिसने किया , उसकी ना मौत आई
खामोश जी रहा था सफर  …
हमने सजाया ऐसे घर , सपनें जगा जगा
दामन में कंदील के , रंग लाई रोशनाई
खामोश जी रहा था सफर  …
किसने दीया जला के किया , रोशन जहान को
फिर से कोई तारा टुटा , या उम्मीद जगमगाई
खामोश जी रहा था सफर  …
#सारस्वत
10092003 

बुधवार, 30 जुलाई 2014

तीज का त्यौहार









#
सावन पे खुमार आया
बारिश की फुंहार लाया
आया आया आया प्यारा
तीज का त्यौहार

देखो बातो बातों में
मेंहदी रच गई हाथों में
चूड़ी चुनरी रंग महकाया
तीज का त्यौहार
आया आया आया प्यारा
तीज का त्यौहार

झूले पड़ गए बगिया में
होड़ लगी है कलियों में
खुशियों की बहार लाया
तीज का त्यौहार
आया आया आया प्यारा
तीज का त्यौहार

#सारस्वत
30072014 

शनिवार, 26 जुलाई 2014

सोच को लिखोगे तो , कलम बद्ध कर जाओगे

#

लिखने के लिए सोचोगे तो , सोचते रह जाओगे
सोच को लिखोगे तो , कलम बद्ध कर जाओगे

सीधी सरल सरिता सी , जीवन की धारा नहीं है
अंतःचक्षु बिंदु खोलो , जीवन को समझ जाओगे
सोच को लिखोगे तो ...

टेढ़ी मेढ़ी राहों के , पथरीले पथ पर है मंजिल
रुको नहीं चलो , लक्ष्य पर भी पहुंच जाओगे
सोच को लिखोगे तो ...

जिस दिन दृढ़ निश्चयी , आदित्य से सीख लोगे
हार को गले का हार बनाना , जीतना सीख जाओगे
सोच को लिखोगे तो ...

बहुत कुछ लिख रहा है , जीवन छण प्रतिछण
नहीं पढ़ पाये इस जनम , तो कोरे रह जाओगे
सोच को लिखोगे तो ...

#सारस्वत
26072014 

शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

तू ही आदि .. तू ही अन्नंत .. श्रष्टि के पालनहार


















#
तू ही आदि .. तू ही अन्नंत .. श्रष्टि के पालनहार ,
कण कण में .. तेरा डेरा बसेरा .. तू ही तारणहार ,

जल में,थल में .. नभ में पवन में ..  तेरी महिमां अपरम्पार ,
ह्र्दय ज्योति में .. प्रकाश दीप में .. तेरा ही संचार ,

चरण शरण में .. ध्यान रहे सदा .. ऐसा दो उपहार ,
जीवन दाता .. भाग्य विधाता .. कर दो तुम उपकार ,

नत मस्तक .. शाष्टांग वन्दना .. प्रणाम करो स्वीकार
ज्ञान ध्यान  ..  रहे श्री चरणों में  ..  प्रसाद में देदो प्यार
#सारस्वत
26022014

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

जै शिव सुन्दर नम:शिवाये






















#
नम:शिवाये .
नम:शिवाये .
जै शिव शंकर नम: शिवाये
जै शिव सुन्दर नम: शिवाये
जै करुणाकर नम:शिवाये
जै गंगाधर नम:शिवाये
ॐ नम:शिवाये
ॐ नम:शिवाये
ॐ नम:शिवाये

देवादि देव आदिदेव महादेव नम: शिवाय
कृतयुग योगी कालरुद्र जगकल्याणक महेश्वराय
शांति सेतु योगाधिपति प्रबर्ह्मरूपा परमेश्वराय
नम: शिवाये . नम: शिवाये .
जै शिव शंकर नम: शिवाये

मंगल कारक विघ्नविनाशक नीलकंठ संकट के नाशक
जै हट योगी रमता जोगी आदिअन्न्ता हे अविनाशक
जटाजूट गंगा श्रीचन्द्र्र अंगराग भस्मी जगपालक
नम: शिवाये . नम: शिवाये .
जै शिव शंकर नम: शिवाये

प्रलयंकरकारी भयंकरभारी त्रिशूलधारी नम: शिवाय
नंदी सवारी नागेश्वरधारी हे डमरूधारी नम: शिवाय
दीनानाथ विश्वनाथ हे कालाशी त्रिपुरारी नम: शिवाय
नम: शिवाये . नम: शिवाये .
जै शिव शंकर नम: शिवाये
#सारस्वत
05082013 

शनिवार, 19 जुलाई 2014

जिंदगी











#
किस बेख्याली में जी रहा है तू जिंदगी
दोबारा मिलने वाली नहीं तुझे ये जिंदगी
किस बेख्याली में  …
खर्च करने से पहले सोच भी लिया कर
साँसो की उधारी पर जीता है तू जिंदगी
किस बेख्याली में  …
हासिल क्या होगा आईने को तोड़ कर
सुरत में नहीं है सीरत में है ये जिंदगी
किस बेख्याली में  …
तेरा ख्यालों की पतंगें उड़ाना फ़ुज़ूल है
हक़ीक़त की सख्त ज़मीन है ये जिंदगी
किस बेख्याली में  …
मायूसियों से मंजिलों का क्या है वास्ता
हौसलों से जीया तो जीत लेगा तू जिंदगी
किस बेख्याली में  …
#सारस्वत
19072014 

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

बेटी के लिए "दुआ"


#
मासूम नज़र को नज़र ना लगे दुआ करूँगा 
खुशियों की ना कोई टूटे माला दुआ करूँगा 
मासूम नज़र को नज़र ना लगे  … 

मेरी कोशिश हमेशा बद'नजर से बचाने की 
टूट कर बिखर ना जाओ यही दुआ करूँगा 
मासूम नज़र को नज़र ना लगे  … 

मिलना और बिछुड़ना तो दस्तुर ऐ दुनिया है 
धड़कते दिल से याद करें अपने दुआ करूँगा 
मासूम नज़र को नज़र ना लगे  … 

सांसो का भरोसा नहीं कब थक के बैठ जायें 
जिंदगी मरने पे आंसू न लाये दुआ करूँगा 
मासूम नज़र को नज़र ना लगे  … 

#सारस्वत 
15102013

रविवार, 6 जुलाई 2014

रिश्तों के नाम पर





















#
जिंदगी की राह में मिलते यहाँ तरहा तरहा के लोग
रिश्तों के नाम पर खेलते यहाँ तरहा तरहा के लोग

*

मोहब्बत की राहों में आजकल बेहयाई का राज है
तोड़ता है दिल यहाँ पर वही जो शातिर अंदाज़ है
सजाते है दुकान'ऐ,दिल यहाँ तरहा तरहा के लोग
रिश्तों के नाम पर खेलते यहाँ  …
जो कहते थे जी नहीं पाएंगे एक पल तुम्हारे बिना
जो लड़ते थे बे-लाग सारी रात किसी बात के बिना
बतंगड वही सब बनाते हैं यहाँ तरहा तरहा के लोग
रिश्तों के नाम पर खेलते यहाँ  …
हमने देखा है यहाँ नीमबाज़ आखों को भी रोते हुये
नजरें बचाकर निकलते गुरबते'इश्क शर्मिंदा होते हुए
बड़े शौंक से दिल तोड़ते हैं यहाँ तरहा तरहा के लोग
रिश्तों के नाम पर खेलते यहाँ  …
#सारस्वत
15072013


बुधवार, 2 जुलाई 2014

ख़ामोशी















#
ख़ामोशी में भी ख़ामोश , कहाँ रहती हैं ख़ामोशी
यादों की हो बरसात तो , शौर करती हैं ख़ामोशी

वो फुर्सत के लम्हों की , खुबसूरत प्यारी सी बातें
आज भी फुर्सत के पलों में , तोड़ देती हैं ख़ामोशी

वो बालों को सहलाना तेरा , वो प्यारा सा गीत गाना
हवा की हो सरसराहट तो ,  गुनगुनाती हैं ख़ामोशी

वो धीरे से मुस्कुराना तेरा , वो खुशबु सा महक जाना
और मचल कर लिपट जाना , याद दिलाती हैं ख़ामोशी
#सारस्वत
02072014

गुरुवार, 26 जून 2014

कौन है तू












#
दिन नहीं ,
दिन का उजाला नहीं
रात क्या ,
रात का अँधेरा भी नहीं
लू नहीं , धुप नहीं ,
गम ख़ुशी की छाया भी नही
साथ चलता है ,
नजर आता भी नहीं
कौन है तू ,
तू तो मेरा साया भी नहीं
#
मैं ..
अपना हूँ पराया नहीं
तुने  ..
मुझे कमाया नहीं
मैं  ..
हवा नहीं पानी नहीं
समय नहीं , साया नहीं
जमीं नहीं , आसमां नहीं
जिस्म नहीं , काया नहीं
जिंदगी है तू ,
और मौत हूँ मैं ..
मुझ सा रिश्ता तो यहाँ ..
किसी ने निभाया भी नहीं
#सारस्वत
20072013



बुधवार, 25 जून 2014

जिधर देखो उधर धर्म के ठेकेदार कई बैठे हैं












#
जिधर देखो उधर , धर्म के ठेकेदार कई बैठे हैं
हर मोहल्ले में , धर्म के दुकानदार कई बैठे हैं

सोचता हूँ मैं भी , धर्माधिकारी बन जाऊँ
पकौड़ी प्रसाद में दूँ , पर्स खाली करवाऊं
अच्छा धंधा है , चुटकी राख अगरबत्ती का
गली गली में , परोपकारी व्योपार लिए बैठे हैं
जिधर देखो उधर , धर्म के  …
दान दक्षिणा से , टपकेगा नूर मुझ में भी
कर दूंगा प्रचार , हूँ चमत्कार खुद में ही
चमकेगा सितारा , फ़क़ीरी का अपना भी
आँख के अंधे , पढे लिखे बीमार कई बैठे हैं
जिधर देखो उधर , धर्म के  …
नये तजुर्बों की , क़िस्मत लिखवाता रहूँगा
जब तक जीऊँगा , बाबाजी बन कर रहूँगा
मरने के बाद तो , कीर्तिमान बन ही जाऊँगा
कलयुग में कई , भगवान यूँ ही बने बैठे हैं
जिधर देखो उधर , धर्म के  …
#सारस्वत
25062014 

शनिवार, 14 जून 2014

एक मैं हूँ , एक तुम हो



#
एक मैं हूँ ,   के   मैं   मैं   ना   रहा
एक तुम हो , जो रही तुम ही रही
#
एक मैं हूँ , जो खुद को भूल बैठा हूँ
एक तुम हो , जिसे जरा भी याद नहीं
#
एक मैं हूँ , वादे वफ़ा में जीता रहा
एक तुम हो ,के' वफ़ा का पता ही नहीं
#
एक मैं हूँ ,जो' तुमसे जुदा हो ना सका
एक तुम हो , दिलसे कभी मिले ही नहीं
#
एक मैं जिससे , तुम ही मिलने वाले थे
एक तुम हो ,  बिछुड़े फिर मिले ही नहीं
#
एक मैं हूँ , किया ना कभी सवाल कोई
एक तुम हो , तुम्हारा तो जवाब ही नहीं
#
एक मैं हूँ ,के' बाकी ना रहा कुछ भी
एक तुम हो , सब कुछ तुम ही रही
#सारस्वत
14062014 

गुरुवार, 12 जून 2014

प्यास बहुत है अंतर्मन में



#
प्यास बहुत है अंतर्मन में
तृप्ति की इच्छा सागरमन में

व्याकुल मन है प्रेम मार्ग पर
तरल व्यथा कथा हृदयतल में

स्व्प्न पंखुरी झर मुरझऐ
मृगतृष्णाई मरुथल में

पीड़ा के राग बहुत हैं
स्मृतियों के उपवन में

आशाओं की अंजुरी भरलो
विश्वाश के अरुणांचल में
#सारस्वत
23022014 

गुरुवार, 5 जून 2014

" पर्यावरण -:- दिवस -:- विशेष "


#
जल से खेल रहा है मानव
पल से खेल रहा है मानव 
धन लिप्सा में दानव मानव
कल से खेल रहा है मानव
जल से ....
मौसम ने हुंकार भरी है
कुदरत की ये मार बड़ी है
हरियाली पे थोक के पत्थर
छल से खेल रहा है मानव
जल से ....
नही देख रहा सुखी जल धरा
काट काठ किया बंजर सारा
प्यासी धरती बिलख रही है
तल से खेल रहा है मानव
जल से ....
जन गण मन से आवाहन है
जल जीवन का सम्बोधन है
जल जीवन का प्राणाहल है
हल से खेल रहा है मानव
जल से ....
#सारस्वत
20 06 2010

बुधवार, 4 जून 2014

मत पूछो किधर जा रहा हूँ मैं










#
मत पूछो किधर जा रहा हूँ मैं
देश तरक्की कर रहा है इन दिनों
सच बोलूँगा तो कहोगे आँख में ऊँगली डाल दी
इसीलिए मुँह को ताला लगा लिया है इन दिनों
#
छुप के मिलना सच्चा लगता है
घर से भागना अच्छा लगता है
इज्जत की जरूरत नहीं रही जिंदगी में
प्यार का फ़ितूर अच्छा लगता है इन दिनों
मत पूछो किधर जा रहा हूँ मैं
देश तरक्की कर रहा है इन दिनों
#
फिल्मों के किसिंग सीन क्लिक करते हैं
बिस्तर के गरम सीन अच्छे लगते हैं
घर में सभी शौंक से देखते हैं साथ बैठ कर
शर्मोहया का पर्दा खुद शरमा रहा है इन दिनों
मत पूछो किधर जा रहा हूँ मैं
देश तरक्की कर रहा है इन दिनों
#
तड़का आइटम सोंग का लग रहा है
भारत सैक्सी इंडिया बनता जा रहा है
अंडरवियर पहन कर दिखाओ या चॉकलेट खिलाओ
परफ्यूम लगाकर लड़की को पटाया जा रहा है इन दिनों
मत पूछो किधर जा रहा हूँ मैं
देश तरक्की कर रहा है इन दिनों
#
सबसे हॉट की खबर बनती है
भैंस चौरी ब्रेकिंग न्यूज़ चलती है
देश का चौथ स्तम्भ क्रन्तिकारी जिम्मेदारी निभा रहा है
प्रदर्शन अंग प्रदर्शन लाइव टेलीकास्ट चल रहा है इन दिनों
मत पूछो किधर जा रहा हूँ मैं
देश तरक्की कर रहा है इन दिनों

#सारस्वत
04062014 

सोमवार, 26 मई 2014

आया है माँ का लाडला











#
राग देश अनुराग भेष , आया है माँ का लाडला
माँ भारती की सेवा में , आया है माँ का लाडला
*
हो रहा है शंखनाद , जन गण मन के मान का
हिमालय से इन्दुसरोवर , नव भारत निर्माण का
तिलक चन्दन काशी गंगा , गौ का रक्षक लाडला
माँ भारती की सेवा में , आया है माँ का लाडला
*
उन्नति के उच्च शिखर पर इस तरह से नाम हो
विश्व के शीर्ष शिखर पर भारत का सम्मान हो
नव उदय का निश्चय लेकर आया है माँ का लाडला
माँ भारती की सेवा में , आया है माँ का लाडला
#सारस्वत
26052014 

गुरुवार, 22 मई 2014

प्रारब्ध में क्या लिक्खा है



#
प्रारब्ध में क्या लिक्खा है
भ्रमजाल में उलझ गया
प्रारब्ध में  …
बाल सुलभ एहसास सखा का
लवण प्रियतम छिड़क गया
प्यार का सागर भीतर भीतर
भर छलांगे गुजर गया
प्रारब्ध में  …
झुलसा झुलसा प्रेमाग्नि में
मन कस्तूरी पिघल गया
विरह के पथ पर अटका सटका
प्रेम अगन में भटक गया
प्रारब्ध में  …
ऊष्मा ऊर्जा मुर्झाने लगी हैं
शोकगीत के गाने लगी हैं
बर्फ जम गई शरदऋतु सी
मन चंचलमन किधर गया
प्रारब्ध में  …
#सारस्वत
18052014

रविवार, 18 मई 2014

तन्हाइयों से परेशांन हूँ













#
तन्हाइयों से परेशांन हूँ , फिर भी जीये जा रहा हूँ
मैं क्या करूँ कहाँ जाऊँ , यूँ ही जीये जा रहा हूँ
*
क्यूँ कुलबुलाते हैं दिल में ये अरमाँ
जब इनकी कोई भी मंज़िल नहीं है
लेता हूँ गैरों से अपने पे अहसाँ
क्यूँकि मेरा कोई , साहिल नहीं है
दुनिया के आगे पशेमांन हूँ , फिर भी जीये जा रहा हूँ
मैं क्या करूँ कहाँ जाऊँ , यूँ ही जीये जा रहा हूँ
*
मुझे अपनी साँसो से शिकवा ना होता
कभी कोई मुझसे मुहब्बत जो करता
अगर हमसफ़र कोई मेरा भी होता
क्यूँ मैं अकेले में घुट घुट के मरता
अपने मुकद्दर पे हैरान हूँ , फिर भी जीये जा रहा हूँ
मैं क्या करूँ कहाँ जाऊँ , यूँ ही जीये जा रहा हूँ
#सारस्वत
01021998  

शुक्रवार, 16 मई 2014

सुप्रभातम













#
हिमालय से इन्दू सरोवर
हिन्दुस्ताँन मेरा भारत
अखण्ड एकता नवचेतना
जीवन दर्शन मेरा भारत
मेरा भारत युवा भारत
सबसे प्यारा मेरा भारत
स्वतंत्र भारत मेरा भारत
गणतंत्र भारत मेरा भारत
#सारस्वत
17052014

गुरुवार, 15 मई 2014

गुगल ने किया सलाम








#
खुल के हुआ मतदान , किया गुणगान दुनियाँ ने
गुगल ने किया सलाम , गुगल की समझदारी है
उज्व्व्ल भारत की खातिर , जनशक्ति एक हो गई
चंद घंटो की देरी सेरी , फिर मतगणना की बारी है
करो तैयारी खुली हवा की , जनता यही दोहराती है
कमल खिलेंगे गिनते जाना , गणना सब सरकारी है
#सारस्वत
15052014 

पंथ अनेक पथिक अनेको

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पंथ अनेक पथिक अनेको , अनगिनत पठ्येय
वर्ण ध्यान एक चितरंतर  , और एक है ध्येय
*
आने को तेरे मन्दिर में , प्रभुः लाखों हैं द्वार
मनमष्तिष्क मानस पटल पर , है ऐक ही सार
उस श्र्द्धेय पथ को ज्ञान चक्षुः लेते हैं पहचान
पर्वत माला जिस मार्ग में , गीता वेद पुराण
भुला भटका सा ये राही , अब तक रहा है डोल
इस दुविधा में जाने कितने , द्वार चुका टटोल
हे प्रभु , बिना प्राप्त किये ,तेरा स्वछन्द संकेत
पा ना सकुंगा हे परवर , तेरा पुण्य निकेत
मै ना जानू मै क्या हूँ , मै ना जानू तू क्या है
मै ना जानू जीवनमृत्यु , मै ना जानू जग क्या है
मैं ना गया मँदिर सीढ़ी , मैं ना घुमा चारो धाम
गृहस्ती बंधन में उलझा हूँ , ये जीवन है संग्राम
सुखदुःख के जो बादल छाये , सब बातें बेमानी हैं
मै ना हारा तू ना जीता , जाँ भी तेरी दिवानी है
अब उम्र नहीं लम्बी मेरी , ना जाने कब ना कैहदे
अन्तिम छण है दीन बन्धु , मुझ्को भी कोई वर दे
मै भी पालुं परम परमातम , तेरा दर्शन श्रेय
वर्ण ध्यान एक चितरंतर  , यही एक है ध्येय
#सारस्वत
11052014 

मंगलवार, 13 मई 2014

सुरमई सपनो के अंदर

#
सुरमई सपनो के अंदर 
पंख लगे हैं सुंदर सुंदर 

सुरमई ...
*
तितली मन उड़ता जाता 
कलियोँ सा खिलता जाता 
खिली धुप सा इतराता है 
मनमयूर देख के अम्बार 
सुरमई ...
*
अन्तर्मन विचरन करता 
चंचल मन उड़ता फिरता 
सपन सरीखी सीप के अंदर 
अंनत शिखाऐ बीच समंदर 
सुरमई ...
*
हर पल आते नींद झरोंखे 
रंग सुनैहरी हवा के झोखे 
इंद्रधनुष की जलधारा है 
मुक्तधरा सपनो के अन्दर 
सुरमई ...
#सारस्वत 
23012014