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शनिवार, 27 दिसंबर 2014

मन में
















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विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में
सवाल ही सवाल हैं , व्याकुल मन में

कुछ सुलझी अनसुलझी सी यादें हैं
कुछ अटकी सटकी सी बातें हैं
कुछ स्मृतियाँ हैं प्रतिमाओं की
कुछ जीवित शंकाएं हैं सागर मन में
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में

कभी शब्दों को शब्द नहीं मिलते हैं
कभी खुद में उबलने सुलगने लगते हैं
कभी अखरने लगते हैं शब्दकोश 'तो,
कभी चुप्पी साध लेते हैं मंथन में
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में

कहीं बर्फीली चादर को ओढ़े रिश्ते हैं
कहीं पतझड़ से बिखरे छितरे पत्ते  हैं
कहीं फैला घनीभूत कुंठाओं का कोहरा
कहीं भ्रम के बादल हैं मन उपवन में
विचारों का कोलाहल है , बेकल मन में
#सारस्वत
27122014 

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

रामा दुहाई [एल्बम गीत ]

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नींद नहीं आई
यही है सच्चाई
नींद नहीं आई , यही है सच्चाई
रामा दुहाई  …
रामा दुहाई  … …
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गलत सही का कुछ भी मुझको , पता नहीं था
दोस्तों ने पकड़ के मुझको , बिठा लिया था
आज ख़ुशी का दिन बता के , चढ़ा दिया था
एक पैग वहीं पे मैंने , लगा लिया था
पर साथ में तेरे  …
ये क्यूँ आई  … …
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#
मैं तो तुझको चिड़ा रहा था , जान ओ मेरी
अरे' कोल्डड्रिंक है  जान ले तू भी जान ओ मेरी
गलती करके बोल रहे हो , मान लो मेरी
तोड़ दो बोतल 'मेरे दिलबर' जान ओ मेरी
माफ़ी तो मैने  …
मांग ली माई  … …
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#
तुम बिस्तर पर करवट काहे बदल रहे हो
मेरी तरहा से तुम भी शायद मचल रही हो
सारी सारी रात जगाया 'अब, रहने भी दो
अपनी बाँहों में मुझको 'तुम, सोने भी दो
तेरी मेरी साँसें  …
पास जो आई  … …
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#
नींद नहीं आई
यही है सच्चाई
नींद नहीं आई , यही है सच्चाई
रामा दुहाई  … रामा दुहाई  … …
#सारस्वत
02042005 

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

आईने के सामने

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अपने आप से मिलता नहीं हूँ , मैं आईने के भी सामने
पता नहीं कब किस बात पर , शर्मिंदा कर दे ये मुझे

बातें होती नहीं मेरी खुद से , अब अपने आप से कभी
मशवरे फ़ालतू के आज कल , अच्छे नहीं लगते मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....

किसकी फ़िक्र करूँ बता , खुद की या तेरी नाराजगी की
तूने ही तो सिखाया था कल , मतलब का मतलब मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....

नई रौशनी लेकर चलता हूँ , अब साया नजर नहीं आता
यही इलाज था इसका  , हर वक़्त टोकता था ये मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....

बेशर्मी का राज क़ायम है , अब सल्तनत ऐ ज़मीर पर
हाँ हाँ ' कर ले मुलाकात ईमान , आकर डरा ले अब मुझे
पता नहीं कब किस बात पर ....
#सारस्वत



रविवार, 7 दिसंबर 2014

सांस उदारी बड़ा भिखारी

#
सांस उदारी बड़ा भिखारी
केसदा करदा तू मान
मिटटी पुतला देश बगांना
कदे तां खुद नू जान
#
अल्लन बल्लेया धूंधूं जल्लेया
धुँयाँ बणी ते राक्ख
जिंदड़ी पाई नॉल गवाई
लब्बेया की कुछ चाक्ख
पांज घरांदा बण प्रोणा
कदें ना सक्केया जान
मिटटी पुतला देश बगांना ...

मेरा तेरा करदे करदे
कीकुछ दस तूं पाया
धनं दोल्लात बेट्टा बेट्टी
साब कुछ तां गवाया
झुट्टे सारे रिस्ते नात्ते
रब्ब तों तूं अन्जान
मिटटी पुतला देश बगांना ...
#सारस्वत
07122014

बुधवार, 3 दिसंबर 2014

वो भोपाल गैस त्रासदी की रात

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वो दो और तीन दिसंबर की रात 
वो भोपाल गैस त्रासदी की रात 
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वो मौत के ताण्डव की रात 
वो यूनियन कार्बाइड की रात 
कितनी भयानक 
कितनी दर्दनाक 
वो हैवान के अट्टाहस की रात 
वो शैतान की साज़िश की रात 
जब शमशान हुआ शहर 
उघडा कबिस्तान का क़हर 
वो आधुनिक तरक़्क़ी की रात 
वो औद्योगिक त्रासदी की रात 
जो सोये उस रात 
और सोये रैह गए 
जब मौत आई दबे पांव और 
लील गई जीवन वो काली रात 

#
हे परमपितापरमेश्वर 
तृप्त अतृप्त 
आत्माओं के ईश्वर 
अगर सुन रहा है तू आज कि रात 
उन मासूम आत्माओं को शांति दो 
आज कि रात 
‪#‎सारस्वत‬ 
02122013