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शुक्रवार, 1 मई 2015

हाँ मजदूर है … वो मजदूर है ...














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हाँ मजदूर है … वो मजदूर है  … 
वो भी मजदूर को आज मजदूर ही समझता है 
जैसे हरकोई हाड़मास का पुतला मजबूर समझता है 
हाँ मजदूर है … वो मजदूर है  ...
पेट की भूख की आग के साथ वो भूखा खड़ा है 
उसके घर का चुल्ल्हा आज भी अधसुलगा पड़ा है 
दानापानी के लिए चक्कर लगता है वो दिनरात 
ऊँचे लोगो को वो आज भी भगवान ही समझता है 
हाँ मजदूर है  … वो मजदूर है  ...
संवेदनाये खत्म हो गई है आज दुनिया के लोगो में 
इंसान इंसान के प्रति इस कदर उदासीन हो गया है 
निकल जाता हैं वोभी बराबर से कुछ इस तरहा से 
जैसे मशीन के बराबर से हर कोई यहां निकलता है
हाँ मजदूर है … वो मजदूर है  ...
दुनिया के आगे सर झुकाऐ खड़ा है कई  सदियों से 
गुलाम नही है फिर भी गुलामी ने जकड़ा हुआ है
कुंठा का शिकार बना दिया जिसे सभ्य-समाज ने 
अछूत नही है लेकिन खुद को अछूत ही समझता है 
हाँ मजदूर है  … वो मजदूर है  ...
#सारस्वत 
01052014