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गुरुवार, 26 नवंबर 2015

प्यार ...

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प्यार को प्यार से प्यार का आकार दो 
प्यार के अक्षांस को प्यार से सवाँर दो 

आशाओं को मिलेगी आकांक्षाओं की ओस 
अनुनय विनय को आलिंगन का हार दो 

प्रणय पुष्प पल्ल्वित होंगे ह्रदय पटल पर 
नेह से देह को स्नेह स्निग्ध उपहार दो  

भाव संग जगमग करेगी भावना की लौ 
प्रेम की रीत को प्रीत सा विस्तार दो 

#सारस्वत 
27112015 

26/11














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भूला नहीं जाता  ...

उस रात का मंज़र !

26/11 आती है ...

नाला छूट जाता है !! 

‪#‎सारस्वत‬ 

26112014

सोमवार, 23 नवंबर 2015

शुन्य का आदि ना अंत कोई

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शुन्य तो शुन्य ही होता है
शुन्य का आदि ना अंत कोई
शुन्य का पूरब न पश्चिम कोई
शुन्य का उत्तर ना प्रश्न कोई

विलुप्त संस्क्रती की प्रहरी
संभावनाओ की शुन्यता
म्रत सम्वेदनाओं की देहरी
भाव शुन्य योग शुन्यता
शुन्य तो शुन्य ही होता है
शुन्य का आदि ना अंत कोई

मर्म के बिना धरम शुन्य
कर्म के बिना इंसान शुन्य
रिश्तो के बिना पहचान शुन्य
जीवन म्रत्यु श्मशान शुन्य
शुन्य तो शुन्य ही होता है
शुन्य का आदि ना अंत कोई

शुन्यता में प्रक्रति का उद्गम है
शुन्यांश में श्रष्टि का चिन्तन है
शुन्यांक ध्यान का है चरम बिंदु
शुन्य विज्ञानं का आत्म मंथन है
शुन्य तो शुन्य ही होता है
शुन्य का आदि ना अंत कोई

शुन्य ज्योति है रौशनी है
शुन्य ज्ञान की साधना है
शुन्य रसायन निशब्द है
शुन्य रस है उर्जा है ॐ है
शुन्य तो शुन्य ही होता है
शुन्य का आदि ना अंत कोई

#सारस्वत
06102013

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

ह्रदयमन्दिर में दिपोतस्व


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ह्रदय मन्दिर में मनोवेग कलश स्थापित कीजिये  
दीपक राग अनुराग से अंतर्मन सुसज्जित कीजिये 
ह्रदय मन्दिर में  ...
मन की माला सृजित होवे स्नेह की पंखड़ियों से 
मनकी मुंडेरों पर धवल ज्योति प्रकाशित कीजिये 
ह्रदय मन्दिर में  ...
अंतर्मन की कंदराओं से शकशंकाओं को बिसराइये 
नेहपुष्प प्रेमदीप सघन सुरंगों तक प्रसारित कीजिए 
ह्रदय मन्दिर में  ...
प्रेम प्यार सौहार्द भाष्य उज्ज्वल प्रफुल्लित होगा 
निश्छल निर्मल ज्योतिर्पुंज सर्वत्र प्रज्वलित कीजिये 
ह्रदय मन्दिर में  ...
भाव से प्रभाव से हर संभव समभाव की दीप श्रंखला 
माँ भारती के श्रीचरणों में प्रेमप्रीत समर्पित कीजिये 
ह्रदय मन्दिर में  ...
#सारस्वत 
10112015 

बुधवार, 4 नवंबर 2015

सच बोल रहे हो ना

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तुम लालची हो क्या  ?
नहीं तो  ...
सच बोल रहे हो  ...
हाँ  ...
फिर ये पुरुस्कार क्यों सजा रक्खा है अलमारी में  ??
ये सम्मान के लिए मिला था  ...
अच्छा !!  … कितना सम्मान मिल रहा है  ???
कुछ नहीं पड़ोसी भी दोगला बताते हैं
बोलो सम्मान चाहिए क्या , नाम के साथ में  ????
हाँ चाहिए तो
तो आजा हमारे साथ में  ... भेज दे वापस ,
पुरुस्कार को दे के तलाक ... देखना फिर ,
अख़बार टीवी सब जगह  ....
होगा तेरा ही जलवा  !!!!
तुम डरते हो क्या ?
नहीं तो
सच बोल रहे हो ना
हाँ
तो बोलते क्यों नहीं ??
क्या
असहिष्णुता
#सारस्वत
04112015 

सोमवार, 2 नवंबर 2015

मैं आज़ाद हूँ - लाइव मूवी


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बरसों पहले मूवी आई थी 'मैं आज़ाद हूँ'

जिसमें शबाना पत्रकार का किरदार निभाती है
पत्रकारिता के व्यवसाईकरण से छुब्द होकर
आर्टिकल के रूप में अपना भावी स्तीफा लिखती है
26 जनवरी को आज़ाद मुंबई की सबसे बड़ी बिल्डिंग से
कूदकर आत्महत्या कर लेगा
यहां पर  …
शबाना अपनी पत्रकारिता का हुनर दिखती है
अपने इस्तीफ़े को कलम की आज़ादी बताकर
कलम का नाम आज़ाद रखती है
मतलब  क्या निकला  …
26 जनवरी को शबाना अपनी पत्रकारिता की कलम को
मुंबई की सबसे बड़ी बिल्डिंग से निचे फैंक देगी
और उसके बाद क्या दिखाया जाता है  …
मुंबई से साथ में पूरे भारत में अराजकता का माहोल
उसके बाद  … गुमनामी से अमिताब को ढूंढ कर
उस का आज़ाद नाम रक्ख दिया जाता है
फ़िल्म हम सभी की देखी भाली है  …
आज कल ये मूवी लाइव चल रही है  …
यही दोहराया जा रहा है देश में  …
24 घंटे 24 रिपोर्टर
मैं क़लम 'आजाद' के साथ
महान देश
भारत से
#सारस्वत
02112015 

रविवार, 1 नवंबर 2015

कभी ...

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कभी धडकन को छुआ ख़ामोशी ने लिपटे के
तो कभी धडकन ने सुना सूनेपन को सिमट के

कभी गहरे उतरे यादों के समन्दर में नहाने
तो बैठ गये कुये के कुये रिश्ते हुए रिश्तों के
कभी धडकन को छुआ  ...

कभी पैबंद लगी बातों का चला रतजगा सा
तो कभी टाट के झोंके दस्तक देते ख्वाबों के
कभी धडकन को छुआ  ...

कभी दरिया जा ठहरा नाजुक की आँखों में
तो कभी बारिश बेमौसम झीलों में पलकों के
कभी धडकन को छुआ  ...
#सारस्वत
02 06 2013