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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

आज भी ...

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आज का दिन भी ...
कल की तरह ही पूरब से निकला है
दिनचर आज भी   ...
व्यस्तताओं के बीच नितांत अकेला है

उदास रात के बाद  ...
प्रभात किरणें भी उदास ही चली आती है
ठहरा हर तरफ पहरा  ...
अलबेली खम खामोशी का रुपहला है

पिछड़ गया है दौड़ में
सच को अब यहां कोई पूछता तक नहीं
बदला कुछ भी नहीं  ...
झूठे जीवन में ही अब खुशियों का मेला है

हस्ता हसाता चेहरा  ...
याद वही आता है जो आंसूं छिपाता है
शरारतें खो गई कहीं  ...
मुस्कुराहट बनावटी मुंह हुआ कसैला है
#सारस्वत
29042016 

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

एहसास ...

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देर तलक साथ चलने के बाद जब
पता चलता है अकेले लौटना होगा
घर का पता भी बड़ी दूर लगता है

मुद्दतों साथ में रहने के बाद में
बिछुड़ने का कैसा भी कोई एहसास
फ़ासलों का नया फ़ैसला लगता है

दर्दे मोहब्बत के नाम करने के बाद
हर हिस्सा जिंदगी की सौग़ात का 
एक किस्सा सा लगने लगता है

शिकवों की शिकायतें सुनने के बाद
निगाहें लाख निगाह फेरें जज़्बात से
पलकों से गिला छलकने लगता है
#सारस्वत
03022014 

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

नववर्ष मंगल सुमंगल हो

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नववर्ष मंगल सुमंगल हो
प्रतिपल उज्ज्वल धवल हो














उमंगों का सवेरा हो
उम्मीदों का बसेरा हो
खुशियों का आँगन हो
रश्मियों का आगमन हो
आस का दीपक हो
आशा प्रकाशक हो
सांसों का तर्पण हो
प्रेम का दर्पण हो
साथ का एहसास हो
परस्पर विश्वाश हो
जीवन परिवर्तन हो
सम्पूर्ण समर्पण हो
मानव मन मन्दिर हो
शुभ दिन सुन्दर हो
भू भारती का वंदन हो
भारत माता की जय हो
!! सनातन नववर्ष मंगलमय हो !!
#सारस्वत
08 052016