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मंगलवार, 31 मई 2016

आख़िरी वक़्त था ...

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आख़िरी वक़्त था 
कोई आ रहा था 
कोई जा रहा था 
'मगर ,
जिसे वह बुला रहा था 
वह नदारद था 
साँस अटकी थी आस में 
मिलकर ही जाऊंगा 
और वह ...  
हठयोगी बन बैठा था 
इस अंधे विश्वास में
मिलने ना जाऊंगा  
तो ये भी ना जायेगा 
जिन्दा रहेगा 
एक ज़िद कर बैठा था 
दूसरा रूठ कर बैठा था 
सभी आ रहे थे मिलने 
देख रही थी तमाशा 
दरवाज़े पर खड़ी मौत 
आख़री सांसों का 
आख़िरी वक़्त था 
कोई आ रहा था 
कोई जा रहा था
#सारस्वत 
31052016 

मंगलवार, 17 मई 2016

मैंने पूछा ... कौन हो तुम

उसने कहा  ... वक़्त है पास में तो गुफ़्तगु कर लें
मैंने पूछा  ... कौन हो तुम
उसने कहा  ... तुझमें ही तो रहता हूँ , मुझे भी भूल गये
मैंने कहा  ... ऐसा नहीं है , भीड़ में हूँ भीड़ का हो गया हूँ
उसने कहा  ... अज़नबी क़रीब हुए तो , अपने पराये हो गये
मैंने कहा  ... तुझे सब पता है , रिस्तेनाते किसने भुला दिये
उसने कहा  ... कच्चे घरों में , रिश्ते मज़बूत होते थे
मैंने पूछा  ... थे से क्या मतलब है तुम्हारा  ...
उसने कहा  ... घर पक्के हो गये , रिश्ते मिटटी हो गये
मैंने कहा ... पहले हर आँगन में , नीम के पेड़ जरूर होते थे
उसने कहा  ... आँगन छोटे क्या हुए , पेड़ दरवाज़े हो गये
मैंने पूछा  ... बचपन में गायें होती थी तुम्हारे पास में
उसने कहा  ... जबसे बच्चे बड़े हो गये , कुत्ते शेर हो गये
मैंने पूछा  ... परिवार में क़रीब , अब कौन है तुम्हारे
उसने कहा  ... बेटियां कोख़ में खो गई , बेटे पैदा हो गये
#सारस्वत
17052016 

रविवार, 15 मई 2016

क्या कीजिये ...

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दिल तुमको ही चाहे तो क्या कीजिये
सुकून एक पल ना पाये तो क्या कीजिये
सुकून  ...
तुम्हारे लिए न सही तुम्हारी वज़ह से सही
जान ज़िस्म से रूठ जाये तो क्या कीजिये
सुकून  ...
ख़ामोश सी रातों में तबीयत चुराने वाली
बे मौसम बरस जाये तो क्या कीजिये
सुकून  ...
उलझा कर गेसुओं में दुआ करने वाले
दो हाथ छूट जाएँ तो क्या कीजिये
सुकून  ...
#सारस्वत
15052016 

शनिवार, 14 मई 2016

कुदरत के हैं खेल निराले ...

कुदरत के हैं खेल निराले , तू भी मैं भी उसमें 
धरतीअंबर बिजलीबादल , चाँद सितारे उसमें 
कुदरत के हैं खेल निराले ...

मिले फ़ुर्सत तो सोचना , किसने दुनिया बनाई 
मिटटी का पुतला घड़के , जान फूंक दी उसने 
कुदरत के हैं खेल निराले ...

अरमानों की नौका में दी ,उम्मीदों की पतवार 
हिम्मत घी शक़्कर वाली , दिया हौसला उसने  
कुदरत के हैं खेल निराले ...

कंकर में शंकर के दर्शन , कर लो दुनियां वालो 
सांसे डाली गिनती करके , भर कर चाबी उसने 
कुदरत के हैं खेल निराले ...
#सारस्वत 
14052016

शुक्रवार, 6 मई 2016

वक्त की सुध ले ... ...

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वक्त ने छोड़े हैं वक्त पर निशान
वक्त की सुध ले वक्त का कहा मान
वक्त की सुध ले ...
जानता है तू भी है जानता मैं भी हूँ
मान सम्मान के बिच बैठा है अपमान
वक्त की सुध ले ...
तेरे सवालों का जवाब दे रहा है वक्त
मुझसे क्या पूछता है वक्त का अभिमान
वक्त की सुध ले ...
वक्त का तकाज़ा है वक्त की मांग
खुली आँख से देख माप मान का मान
वक्त की सुध ले ...
फ़िज़ा में शौर है साज़िशों का जौर है
बदल रहा है पारा पल पल दिनमान
वक्त की सुध ले ...
#सारस्वत
06052016

रविवार, 1 मई 2016

मजदूर दिवस की शुभकामना

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बेरोज़गार ने कुढ़ते हुए कहा  ... 
पहले मजदूर तो बन लें  !!!!! 
सुनते ही  ... 
मजदूर बोला  ... 
अच्छा !!! ... 
पढ़े लिखे हो  .... 
फिर  , 
हिक़ारत से देखकर वो बोला  .... 
फट्टे पर मजूरी करने में शरम आती है , 
ये बोलो  ... 
बेरोज़गार phd बाबू !!!!!!!!
#सारस्वत 
01052016