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सोमवार, 29 मई 2017

नव - संवैधानिक - भारत

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ब्रह्मण को बौद्धिक ज्ञान प्रवीण बुद्धिमान बुद्धि-जीवी माना गया है भारत में
जागरूक समझदार विचारशील अक़्लमंद दानिशमंद जाना गया है भारत में

जाति-भेद स्तम्भों को धराशाई किया भी जा सकता था पाई आज़ादी के साथ
लेकिन,क्षुद्र स्वर्ण सा भेदभाव पुनर्स्थापित किया गया नवसंवैधानिक भारत में

आभाव के नाम पर बाँट-चोट इमदाद के नाम पर केवल बंदर-बाट किया गया
राजनीतीक संरक्षण में मानसिक विकलांगता को आरक्षण दे दिया भारत में

मेधावी चतुर तीक्ष्ण-बुद्धि ब्राह्मण कोई है भी या नहीं यह देखा ना जाना गया
ब्राह्मण का चौकस ब्राह्मण होना ही दोष पैदाइशी माना गया दूरंदेशी भारत में  

मस्त-मलंगी जनता-भोली थाम चुरंगी भेट-चढ़ी स्वाधीनता की ड्योढ़ी पर
विशेष अनुभवी ठप्पेधारी आज़ादी के नेता-लोग षड्यंत्र रच गये भारत में
#सारस्वत
29052014